तेरे चेहरे से पर्दा उठने की देर है
इंतजार का दौर खत्म होने की देर है
युं तो सब सही वक्तपे मिलता है
बस अब वो सही वक्त आने की देर है
हादसोसे पिछा छुटने की देर है
जख्मोके घाव भरनेकी देर है
युं तो सब जख्मोका मरहम वक्त है
बस अब ये मरहम मिलनेकी देर है
बेगानोके दुर जाने की देर है
खुदके करीब आने की देर है
युं तो सब रिश्ते कच्चे धागे है
बस अब वो धागे टुटने की देर है
कलम से स्याही बरसने की देर है
कगज पे बहार खिलने की देर है
युं तो बौछारसे बचता कोइ ना है
बस अब हमारे पकडे जाने की देर है