Monday, July 18, 2011

क्यों कोशिशे अक्सर

क्यों कोशिशे अक्सर.....

आसुँओसे गिलि
मुस्कान पहनने की

उलझे जवाँबोमे
सवाल पुछनेकी

बुझे एहसाससे
इंद्रधनुश खोजनेकी

ठहरे पलसे
नया सवेरा माँगनेकी

बेकरार होठोसे
खामोश कहानि की

फ़टे कपडेसे
आसमाँ ढकनेकी

आजाद खुदको
जंजिरोमे जकडनेकी

मुडती राहोसे
सिधे निशान छोडनेकी

बेदर्द जखमोको
बेवजह छुपानेकी

छुपे जानवरको
इन्सान बनानेकी

खुदको रुसवा कर
गैर महफ़िल मे झूमनेकी


भरे कागजको
स्याहीसे कोरा करनेकी

क्यों कोशिशे अक्सर.........

3 comments:

  1. hmmm...chan jamliye....koshish chalu rakho..... ;)

    ReplyDelete
  2. <<<


    ठहरे पलसे
    नया सवेरा माँगनेकी

    बेकरार होठोसे
    खामोश कहानि की
    >>>
    sundar ga vaibhavi :) liked it ,,
    keep going :)

    ReplyDelete
  3. zakkas yaar
    बुझे एहसाससे
    इंद्रधनुश खोजनेकी

    फ़टे कपडेसे
    आसमाँ ढकनेकी
    waa waaa waaaaa

    ReplyDelete