चुप्पी हावी हो गई जजबात पर
कोई कुछ कहना चाहे भी तो कैसे?
आसान नही बिखरी रुह के साथ चलना
हर ठोकर की किमत चुकाये भी तो कैसे?
मिट जाती है लकीरें भी अक्सर
खाली हातोसे तकदीर का बोझ उठाये भी तो कैसे?
अपनेही ख्वाँबोका आँखे जलाता उजाला
फ़िर पलोकोको कोइ उठाये भी तो कैसे?
सायेका इन्किलाब अपनेही तनसे
जिससे दिल आजाद हो भी तो कैसे?
जमाना है मसरुफ़ बरबादियोंके जश्नमे
कोइ सहारेकी उम्मीद करे भी तो कैसे ?
मुकद्दर के फ़ैसलोका अंदाज है निराला
कोइ इनको बदले या ठुकराये भी तो कैसे?
सायेका इन्किलाब अपनेही तनसे
ReplyDeleteजिससे दिल आजाद हो भी तो कैसे?
Waaaa VAIBHAVI BHIDE waa!!
जमाना है मसरुफ़ बरबादियोंके जश्नमे
ReplyDeleteकोइ सहारेकी उम्मीद करे भी तो कैसे ?
vah kyaa baat hai very true.