Saturday, March 26, 2011

चंद खामोश पलोकी जरुरत

चंद खामोश पलोकी जरुरत
आवाजोकी इस भीड मैं
कितने सारे आवाज
ख्वाहिशोके ख्वाबोके
हसरतोके चाहतोके
टुटे दिलोके
सिसकती धडकनोके
बंद होते दरवाजोके
झॉकती खिड्कीयोंके
कितने सारे आवाज
पतझडके पत्तोके
बहारकी फ़ुलोके
उनपर मंडराते भॅवरोके
कितने सारे आवाज
डुबती नैयाके
तैरते माझीके
किनरोसे लौटति हुइ लहरोके
कितने सारे आवाज
छुटे हुए लम्होके
उगनेवली नैइ लकिरोके
कितने सारे आवाज
चंद खामोश पलोकी जरुरत
आनेवली नयी सदॉए सुननेके लिए

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