खामोशी ही ठीक है मेरे लिये
बाते मुझे रास नही आती
मैं कुछ कहती हुं
लगता कुछ और है
फिर उसपे बाते होती है
कबतक येही सब चलता रहेगा
किसी को तो रुकना होगा
फिर मुझीसे शुरुवात
अब शायद सब ठीक हो जायेगा
जो ठहरा था
मेरे जाने के इंतजार में
ये इंतजार भी बडी कम्बख्त चीज है
कब किसपे मेहरबान हो जाये कुछ कह नही सकते
और हम तो जिंदा भी हैं
तो इसकी बदौलत
वरना कभी मौत ही हमारा पता हुआ करती थी
मगर हम बेवफा हो गए इस इंतजार के चक्कर में
या खुदा हमारी खामोशी भी बाते करने लगी है
अब क्या करे ??
----- वैभवी भिडे
बाते मुझे रास नही आती
मैं कुछ कहती हुं
लगता कुछ और है
फिर उसपे बाते होती है
कबतक येही सब चलता रहेगा
किसी को तो रुकना होगा
फिर मुझीसे शुरुवात
अब शायद सब ठीक हो जायेगा
जो ठहरा था
मेरे जाने के इंतजार में
ये इंतजार भी बडी कम्बख्त चीज है
कब किसपे मेहरबान हो जाये कुछ कह नही सकते
और हम तो जिंदा भी हैं
तो इसकी बदौलत
वरना कभी मौत ही हमारा पता हुआ करती थी
मगर हम बेवफा हो गए इस इंतजार के चक्कर में
या खुदा हमारी खामोशी भी बाते करने लगी है
अब क्या करे ??
----- वैभवी भिडे
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