Friday, July 4, 2014

खामोशी ही ठीक है मेरे लिये 
बाते मुझे रास नही आती 
मैं कुछ कहती हुं 
लगता कुछ और है 
फिर उसपे बाते होती है 
कबतक येही सब चलता रहेगा 
किसी को तो रुकना होगा 
फिर मुझीसे शुरुवात  
अब शायद सब ठीक हो जायेगा 
जो ठहरा था 
मेरे जाने के इंतजार में 
ये इंतजार भी बडी कम्बख्त चीज है 
कब किसपे मेहरबान हो जाये कुछ कह नही सकते 
और हम तो जिंदा भी हैं 
तो इसकी बदौलत 
वरना कभी मौत ही हमारा पता हुआ करती थी 
मगर हम बेवफा हो गए इस इंतजार के चक्कर में 
या खुदा हमारी खामोशी भी बाते करने लगी है 
अब क्या करे ?? 

----- वैभवी भिडे

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