Tuesday, June 17, 2014

ये उस रात की बात है 
जब आप भी बात किया करते थे 
कुछ किस्से थे कुछ गीत थे 
कुछ खास मेरे लिये लिखी गई कहानिया भी 
तारे भी राह देखते थे सुबह की 
हमारी इक झलक पातेही उनकी राते जगमगा उठती थी 
वो एक दौर था ये एक दौर है 
रात तरसती है सुनने के लिये 
और हम बोलकेभी कुछ कह नही पाते 
ये अलग बात है की                                               
आप कुछ सुनना भी नही चाहते 
मगर युही कभी कभी मेरे दिल में ये खयाल आता है 
काश हम आपसे वो बात कह पाते 
कोई कहानी शुरू हो भी जाती 
सुनने सुनाने के लिये 

----- वैभवी भिडे

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