छुटकारा देदो मुझे अब
इन बेबस, लाचार गलियोसे
जिनकी हर राह मुडती ही नाकामायाबी कि तरफ
मुझे नही बनना उनका इक हिस्सा
मेरे कदम बार बार रुख कर रहे हैं
पूरब की और
वोही तो है मेरा देस शहर और घर
उसकी कच्ची दीवारोसे भी
हौसले की महक आती है
मिट्टी के रोम रोम में भरा है साहस
इससे कुछ भी बनाव
दिया घडा या फिर मूरत
कच्चा न रहेगा
असली सिक्का है
कामयाबी की सुरत ऐसीही होती है
देर सवेर सही मैं पोहोचुंगी जरूर वहा
----- वैभवी भिडे
इन बेबस, लाचार गलियोसे
जिनकी हर राह मुडती ही नाकामायाबी कि तरफ
मुझे नही बनना उनका इक हिस्सा
मेरे कदम बार बार रुख कर रहे हैं
पूरब की और
वोही तो है मेरा देस शहर और घर
उसकी कच्ची दीवारोसे भी
हौसले की महक आती है
मिट्टी के रोम रोम में भरा है साहस
इससे कुछ भी बनाव
दिया घडा या फिर मूरत
कच्चा न रहेगा
असली सिक्का है
कामयाबी की सुरत ऐसीही होती है
देर सवेर सही मैं पोहोचुंगी जरूर वहा
----- वैभवी भिडे
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