फिर लौट आया वो बारीश का एहसास
कई सालोसे जो गुमाशुदा था
ताकझाक कर रहा झरोकोसे
अपनी अटखेलियोसे गुदगुदा रहा है
अब हसी कहा रुकनेवाली है घर में बंद
आ ही जायेगी बाहर निकल
फिरसे आंगन का कब्जा लेके
कर देगी खामोशी को उथलपुथल
सालोसे जमे बर्फीले पैर
बह जायेंगे इस मौसम में
फिर एक बार
वोही सब दोहराया जाएगा
बिना किसी सिलवट के बदले
यकीन नही होता
आज भी मैं बिलकुल नही बदली
----- वैभवी भिडे
कई सालोसे जो गुमाशुदा था
ताकझाक कर रहा झरोकोसे
अपनी अटखेलियोसे गुदगुदा रहा है
अब हसी कहा रुकनेवाली है घर में बंद
आ ही जायेगी बाहर निकल
फिरसे आंगन का कब्जा लेके
कर देगी खामोशी को उथलपुथल
सालोसे जमे बर्फीले पैर
बह जायेंगे इस मौसम में
फिर एक बार
वोही सब दोहराया जाएगा
बिना किसी सिलवट के बदले
यकीन नही होता
आज भी मैं बिलकुल नही बदली
----- वैभवी भिडे
No comments:
Post a Comment