वो कहते रहे फूल खिलेंगे
बस तुम काटो को अनदेखा किया करो
जमाने में कई रंग घुले है
रात में मत उलझे रहो
चलो ये भी मान लेते हैं
हर बार की तरहा
कौन फिजुल में वक्त जाया करे
उन्हे समझाने में
ये गुलशन हमानेही तो बौया है
आखिर हम भी किसी बहारसे तो कम नही
----- वैभवी भिडे
बस तुम काटो को अनदेखा किया करो
जमाने में कई रंग घुले है
रात में मत उलझे रहो
चलो ये भी मान लेते हैं
हर बार की तरहा
कौन फिजुल में वक्त जाया करे
उन्हे समझाने में
ये गुलशन हमानेही तो बौया है
आखिर हम भी किसी बहारसे तो कम नही
----- वैभवी भिडे
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