उफ ये रातोकी नींद
कितनी देरतक रहती है
एक हम है
जिससे इंतजार नही होता
और एक ये सुबह है
जो जलदी नही आती
कितनी देर सजसवरने में लगाती है
कोई उसे बताओ जादा धूप अच्छी नही
थोडी औस की बुंदे पहना करो
अलग नूर आ जाएगा
हम भी उस "अलग" की तलाश में हैं
पर वो है की पर्दानशीन होकर छुपा है
लेकिन इस बात से बेखबर
सुबह के आतेही नींद खुल जाएगी
और धुंदला आसमान साफ नजर आएगा
बस ये रात कब जगेगी
हम से और इंतजार नही होता
---- वैभवी भिडे
कितनी देरतक रहती है
एक हम है
जिससे इंतजार नही होता
और एक ये सुबह है
जो जलदी नही आती
कितनी देर सजसवरने में लगाती है
कोई उसे बताओ जादा धूप अच्छी नही
थोडी औस की बुंदे पहना करो
अलग नूर आ जाएगा
हम भी उस "अलग" की तलाश में हैं
पर वो है की पर्दानशीन होकर छुपा है
लेकिन इस बात से बेखबर
सुबह के आतेही नींद खुल जाएगी
और धुंदला आसमान साफ नजर आएगा
बस ये रात कब जगेगी
हम से और इंतजार नही होता
---- वैभवी भिडे
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