Tuesday, June 17, 2014

उफ ये रातोकी नींद 
कितनी देरतक रहती है 
एक हम है 
जिससे इंतजार नही होता 
और एक ये सुबह है 
जो जलदी नही आती 
कितनी देर सजसवरने में लगाती है 
कोई उसे बताओ जादा धूप अच्छी नही 
थोडी औस की बुंदे पहना करो 
अलग नूर आ जाएगा 
हम भी उस "अलग" की तलाश में हैं 
पर वो है की पर्दानशीन होकर छुपा है 
लेकिन इस बात से बेखबर 
सुबह के आतेही नींद खुल जाएगी 
और धुंदला आसमान साफ नजर आएगा 
बस ये रात कब जगेगी 
हम से और इंतजार नही होता

---- वैभवी भिडे

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