Tuesday, June 17, 2014

सब चीजोकी हद हुआ करती थी कभी 
अब तो हद भी करती  है सारी हदे पार 
कहा जाओगी सीता 
किसे बुलाओगी द्रौपदी 
हर किसी में  यहा 
छुपा है शैतान 

तेरी आग ही है मरहम 
बस इतना जान ले 
अग्निपरीक्षा नही 
अग्निदहन सिख ले 

कटी पतंग तू है 
तो मांझा बन तू 
डूबती नैय्या तू है 
तो दर्या बन तू 
दर्द तू है 
तो एहसास बन तू 
पीडिता तू है 
तो न्यायदेवता बन तू 

अब इंतजार मत कर 
खुदको आश्वस्त कर दे तू 
बनकर प्रार्थना 
लौ उजियागर कर दे तू 
हे स्वयं जगतजननी 
नयाविश्व निर्माण कर दे तू 

----- वैभवी भिडे

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