सब चीजोकी हद हुआ करती थी कभी
अब तो हद भी करती है सारी हदे पार
कहा जाओगी सीता
किसे बुलाओगी द्रौपदी
हर किसी में यहा
छुपा है शैतान
तेरी आग ही है मरहम
बस इतना जान ले
अग्निपरीक्षा नही
अग्निदहन सिख ले
कटी पतंग तू है
तो मांझा बन तू
डूबती नैय्या तू है
तो दर्या बन तू
दर्द तू है
तो एहसास बन तू
पीडिता तू है
तो न्यायदेवता बन तू
अब इंतजार मत कर
खुदको आश्वस्त कर दे तू
बनकर प्रार्थना
लौ उजियागर कर दे तू
हे स्वयं जगतजननी
नयाविश्व निर्माण कर दे तू
----- वैभवी भिडे
अब तो हद भी करती है सारी हदे पार
कहा जाओगी सीता
किसे बुलाओगी द्रौपदी
हर किसी में यहा
छुपा है शैतान
तेरी आग ही है मरहम
बस इतना जान ले
अग्निपरीक्षा नही
अग्निदहन सिख ले
कटी पतंग तू है
तो मांझा बन तू
डूबती नैय्या तू है
तो दर्या बन तू
दर्द तू है
तो एहसास बन तू
पीडिता तू है
तो न्यायदेवता बन तू
अब इंतजार मत कर
खुदको आश्वस्त कर दे तू
बनकर प्रार्थना
लौ उजियागर कर दे तू
हे स्वयं जगतजननी
नयाविश्व निर्माण कर दे तू
----- वैभवी भिडे
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